32. सरनावड़ा-जिला नागौर, गाँव पौने चार, कुरब बांह, इकेवड़ी ताजीम, रेख 10600 गोयन्ददासीत
मेड़तिया।
33. नवो-जिला नागौर, गाँव साढे तीन, कुरब हाथ, इकेवड़ी ताजीम,रेख 18012 रु.। 34.
धनकोली-जिला नागौर, कुरब बांह, दोवड़ी ताजीम, रेख 7000 रु.। गोयन्ददासोत मेड़तिया।
35. तोसीना-जिला नागौर, गाँव 3, कुरब हाथ, ताजीम इकेवड़ी,रेख 9500 रु.। सुरताणोत मेड़तिया।
36. केराप-जिला नागौर, गाँव 3, ताजीम इकेवड़ी,रेख 8500 रु.।
37. भदलिया-जिला नागौर, गाँव 4, कुरब बांह, ताजीम इकेवड़ी, रेख 13000 रु.।
गोयन्ददासीत मेड़तिया।
38. बांसा-जिला नागौर, कुरब बांह, इकेवड़ी ताजीम, गाँव5, रेख 12512 रु.।
39. नाराणपुरा-जिला नागौर, गाँव 8, कुरब हाथ, ताजीम इकेवड़ी, रेख 15925 रु.। गोयन्ददासीत
मेड़तिया।
40. जौलिया-जिला नागौर, गाँव साढ़े तीन, कुरब बांह, इकेवड़ी ताजीम, रेख 7317 गोयन्ददासोत
मेड़तिया।
41. अभयपुरा-जिला जोधपुर, गाँव पोने सात, कुरब हाथ, ताजीम दोवड़ी,रेख 9889 रु.।
42. मीठड़ी-जिला नागौर, गाँव सवा ग्यारह, मीठड़ी ठिकाने की कुल रेख 33400 रु. में से 15000 रु.
की रेख व ताजीम जब्त कर ली गई थी।
43. खोड़-जिला पाली, गाँव 5, कुरब हाथ, ताजीम इकेवड़ी।
44. फालना-जिला पाली, गाँव साढ़े आठ, कुरत हाथ, इकेवड़ी जागीर, रेख 11600 रु. गोपीनाथोत
मेड़तिया। 45. बोरुन्दा-जिला पाली, कुरब बांह, इकेवड़ी ताजीम, रेख6250 रु.।
46. टांगला-जिला नागौर, कुरब बांह, ताजीम इकेवड़ी,रेख 6500 रु.।
इनके अलावा मारवाड़ में मेड़तियों के अनेकों ताजीमी ठिकाने थे। ठिकानों में प्रमुख लूणवा व नीबोद माधोदासोत के मेड़ास, वीजाथल , चीखरणीयावड़ो, ईडवा, सुरियास, कीतलसर, का नीबी खास, द्वारकादासोत का बछवारी, सनदासोतों के खोड़कास, तामड़ोली, वा,तिलागेस आदि ठिकाने थे। मेड़तिया राठौड़ों का मेवाड़ में प्रसिद्ध ठिकाना था बदनौर। बदनौर-यह ठिकाना वीरवर जयमल मेड़तिया को जागीर में राणा उदयसिंह ने प्रदान किया था। जो उनकी मृत्यु के बाद उनके पुत्र मुकुन्ददास एवं उनके वंशजों के अधिकार में रहा। अत: ये अपने को टीकाई भी मानते हैं। मेवाड़ राज्य का यह प्रथम श्रेणी का ठिकाना था। इसकी गिनती मेवाड़ के प्रमुख सौलह उमरावों में थी। इसे हासिल लगान वसूली एवं दीवानी व फौजदारी के उच्च अधिकार प्राप्त थे।
अजमेर मारवाड़ के ठिकाने
मसूदा-जगमाल के अधिकार में मेड़ता था। उसके पुत्र हनुवन्त सिंह को बादशाह अकबर ने ई.1558 में मसूदा ठिकाना मनसब में दिया। उन्होंने मसूदा पंवारों से विजय किया (अजमेर पृ.289) उनके छोटे भाई लालसिंह ने बागसुरी बसाई। उनके बड़े भाई कल्लाजी के वंश में जयपुर में बूढ़ा देवल का ठिकाना था। अजमेरा के ठिकानों में मसूदा आमद में सबसे बड़ा ठिकाना था जिसे ज्यूडिशियल अधिकार प्राप्त थे। मसूदा ताजीमी इस्तमुरार ठिकाना था। मसूदा के राव विजयसिंह बड़े प्रगतिशील शासक थे। इनको विशेष योग्यता के कारण मेयो कॉलेज से सोर्ड ओफ ओनर दिया गया था।
राव विजय सिंह के पुत्र राव नारायण सिंह सन् 1952 के प्रथम चुनाव में अजमेर असेम्बली के सदस्य चुने गये। आप राजस्थान विधान सभा के लम्बे असें तक सदस्य रहे हैं। 15 साल तक राजस्थान मन्त्रीमंडल के विभिन्न पदों पर रहे तथा राजस्थान विधान सभा के उपसभापति भी रहे हैं। राव साहब भारतीय दर्शन के विद्वान और हिन्दी के श्रेष्ठ लेखक हैं। आपकी वेदान्त पर कुछ पुस्तकें भी प्रकाशित हुई हैं।
रानी उर्मिला देवी जी मसूदा राजस्थान समाज कल्याण बोर्ड की अध्यक्षा रह चुकी हैं। आपके बड़े पुत्र इन्द्रजीतसिंह दो बार विदेशों के राजदूत रह चुके हैं।
बाघसुरी-अजमेर मेरवाड़ा का मेड़तियों का दूसरा ताजीमी इस्तमुरार ठिकाना था। मसूदा के हनुवन्तसिंह के छोटे भाई लालसिंह ने जंगल में बाघ और सूअर को लड़ते देखा। सूअर ने बाघ को जिस स्थान पर पछाड़ा था उसी जगह गड़ें बनवाकर गाँव बसाया जिसका नाम बाघसुरी रखा ।
जनरल नाथूसिंह-डुंगरपुर राज्य के ठिकाना गुमानपुरा के निवासी ले. जनरल नाथूसिंह हुतियागी हैं। स्वभाव सेनाके हासमेंआने सशक या वृद्धि की है।
भगवानपुरा के ले. जनरल कल्याणसिंह जालिमसिंहोत मेड़तिया एक सुयोग्य जनरल थे। यह समाज सेवा में भी बड़ी रुचि लेते थे। दमोई के मेड़तिया गोविन्दसिंह ब्रिटिश सेना में अधिकारी थे। प्रथम विश्व युद्ध में साहसिक कार्य के लिए उन्हें विक्टोरिया क्रास सैनिक सेवा का सर्वोच्च पदक मिला था।
मेड़तिया राठौड़ जहाँ मेवाड़ की गौरव गरिमा और स्वतन्त्रता के लिए चित्तौड़ के तृतीय साके में,मारे गए थे उसी प्रकार महाराजा रामसिंह जोधपुर और उनके चाचा राजाधिराज बख्तसिंह के पारस्परिक गृहकलह, मरहठों की मारवाड़ की मेड़ता की लड़ाई आदि में भी काम आये थे। मेड़तियों की अकेली रघुनाथसिंहोत प्रशाखा के ही वीरमारवाड़ के शासकों की ओर से बहुसंख्या में रण में जूझ मरे हैं।